Publications

” मन्त्र पुत्र के लिए दो शब्द “

अजीत जी को पहले मैं सिर्फ एक कलाकार व संगीतकार के रूप में जानती थी मगर ऐसा कलाकार जो आज कि भौतिक प्रगति को पूजती दुनिया में भी मानवीय संवेदना, करूणा व जीवन मूल्यो को अपने अंतर्मन में रचाये और बसाये हैं। और जिस में स्रजन कि अदम्य लालसा जीवन के कटु अनुभवो, संघर्षो व मानसिक आघातो के बवजूद जीवित हैं।

View More

” मंत्रपुत्र से “

अक्षरो के समायोजन से उपजा, एक आकार हू मैं ” मैं मंत्रपुत्र हू “

View More

” मृत्यु बोध से “

ये जो आज कल के कांधो पर खडा है इसमें जीवन के कौन से रास्ते का – कौन सा आयाम बडा है?

View More

” मेघ मित्र से “

हवा के कांधो पर सवार सूखी धरती पर नेह लुटाते तुम तो जाने कहां तक जाओगे हे मेघ क्या तुम …

View More