मेरे कार्यक्रमों के कुछ यादगार संस्मरण (भाग 1)

मेरे कार्यक्रमों के कुछ यादगार संस्मरण (भाग 1) मित्रों रंगमंच के कलाकारों को कार्यक्रमों के दौरान कभी कभी ऐसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है जो रोमांचक तो कभी हास्यापद होती हैं और कभी कभी उनकी जान पर भी बन आती है ,प्रस्तुत है कुछ ऐसे ही कार्यक्रमों के संस्मरण . मित्रों एक बार हम[…]

मेरे कार्यक्रमों के कुछ यादगार संस्मरण (भाग 2)

मेरे कार्यक्रमों के कुछ यादगार संस्मरण (भाग 2) मित्रों कल मैंने बताया था किरंगमंच के कलाकारों को कार्यक्रमों के दौरान कभी कभी ऐसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है जो रोमांचक तो कभी हास्यापद होती हैं और कभी कभी उनकी जान पर भी बन आती है ,प्रस्तुत है आज ऐसा ही एक दूसरा संस्मरण .[…]

मेरे कार्यक्रमों के कुछ यादगार संस्मरण (भाग 3)

मेरे कार्यक्रमों के कुछ यादगार संस्मरण (भाग 3) मित्रों कल मैंने बताया था कि रंगमंच के कलाकारों को कार्यक्रमों के दौरान कभी कभी ऐसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है जो रोमांचक तो कभी हास्यापद होती हैं और कभी कभी उनकी जान पर भी बन आती है ,प्रस्तुत है कुछ आज ऐसा ही तीसरा संस्मरण.[…]

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी 1967, भाग 01

बीच में मैं रंगमंच पर मेरे द्वारा ग्वालियर का प्रथम ड्रम सेट बजाता हुआ . मेरी संगीत यात्रा ,भाग १संगीत का शौक और गाना मुझे विरासत में मिला ,मेरे पिता फौरेस्ट ऑफिसर स्वर्गीय श्री महेंद्र पल सिंह बहु अच्छे गायक एवं हारमोनियम वादक थे ,मेरे नाना स्वर्गीय श्री नारायण सिंह जी किसान होने के साथ[…]

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी 1967, भाग 02

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी 1967, भाग 02 सन 1965 की बात है मैं अपने एक दोस्त के साथ बाजार में घूमता हुआ चला जा रहा था ,वो भी बहुत अच्छा गाता था और रंगमंच पर भी कार्यक्रम देता था अचानक वो मुझसे बोला तू स्टेज पर गायेगा ,मैंने तुरंत हामी भर दी[…]

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी 1968, भाग 03

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी 1968, भाग 03 फिर तो आज तक मैंने पलट कर नहीं देखा जूनून था अपने शहर में विश्व स्तर के कार्य क्रम देने का ,स्रष्टि के जन्म बैले 05.06.95 को बैजाताल ग्वालियर के तैरते रंगमंच पर ,मेरे द्वारा लिखित और प्रस्तुत, चार सौ कलाकारों द्वारा कई महीने के[…]

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी 1966, भाग 04

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी 1966, भाग 04 हमारे ऑर्केस्ट्रा का एक फ़ोटो ,मुझे शुरू से ऑर्केस्ट्रा में नये नये प्रयोग करने और नये नये वाद्य Introduce करने का जूनून रहता था ,ड्रम सेट अपने ऑर्केस्ट्रा में शामिल करने के लिये मैं पागल था ,उस जमाने में स्टेज पर ताल वाद्यों में सिर्फ[…]

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी 1970, Part 6

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी 1970, Part 6 मित्रों अपनी संगीत यात्रा की कथा मैं अपने किसी प्रचार के लिये आप लोगों को नहीं बता रहा हूँ बल्कि इसलिये बता रहा हूँ कि इसको पढ़ कर आज की नई पीढ़ी को ये मालुम पड़े कि कितना कठिन संघर्ष होता है एक लक्ष्य को[…]