मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी 1968, भाग 02

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी 1967, भाग 02 लम्बी और संघर्षमयी संगीत यात्रा जो गुरुओं,माता सरस्वती ,और ईश्वर की कृपा से आज भी निरंतर जारी है .(बायें से प्रथम हारमोनियम पर मैं,1967)

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी 1968, भाग 03

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी 1968, भाग 03 1968 में हमने गजरा राजा मेडिकल कॉलेज में समूह गान की परम्परा शुरू की थी जो आज तक भी वार्षिक कार्यक्रमों में कई रूपों में जारी है .(बीच में हारमोनियम पर मैं और नाल पर अनिल भोंसले )एवं चिकित्सा महा विद्यालय के छात्र छात्रायें .

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी 1966, भाग 04

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी 1966, भाग 04 हमारे ऑर्केस्ट्रा का एक फ़ोटो ,मुझे शुरू से ऑर्केस्ट्रा में नये नये प्रयोग करने और नये नये वाद्य Introduce करने का जूनून रहता था ,ड्रम सेट अपने ऑर्केस्ट्रा में शामिल करने के लिये मैं पागल था ,उस जमाने में स्टेज पर ताल वाद्यों में सिर्फ[…]

मेरे कार्यक्रमों के कुछ यादगार संस्मरण (भाग 3)

मेरे कार्यक्रमों के कुछ यादगार संस्मरण (भाग 3) मित्रों कल मैंने बताया था कि रंगमंच के कलाकारों को कार्यक्रमों के दौरान कभी कभी ऐसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है जो रोमांचक तो कभी हास्यापद होती हैं और कभी कभी उनकी जान पर भी बन आती है ,प्रस्तुत है कुछ आज ऐसा ही तीसरा संस्मरण.[…]

मेरे कार्यक्रमों के कुछ यादगार संस्मरण (भाग 2)

मेरे कार्यक्रमों के कुछ यादगार संस्मरण (भाग 2) मित्रों कल मैंने बताया था किरंगमंच के कलाकारों को कार्यक्रमों के दौरान कभी कभी ऐसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है जो रोमांचक तो कभी हास्यापद होती हैं और कभी कभी उनकी जान पर भी बन आती है ,प्रस्तुत है आज ऐसा ही एक दूसरा संस्मरण .[…]

मेरे कार्यक्रमों के कुछ यादगार संस्मरण (भाग 1)

मेरे कार्यक्रमों के कुछ यादगार संस्मरण (भाग 1) मित्रों रंगमंच के कलाकारों को कार्यक्रमों के दौरान कभी कभी ऐसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है जो रोमांचक तो कभी हास्यापद होती हैं और कभी कभी उनकी जान पर भी बन आती है ,प्रस्तुत है कुछ ऐसे ही कार्यक्रमों के संस्मरण . मित्रों एक बार हम[…]

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी (1995-2014), भाग 13-14

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी (1995-2014), भाग 13-14 कार्यक्रम का दिन आ गया और 5 jun 1995 को बैजा ताल के तैरते रंगमंच पर एक इतिहास बन गया “स्रष्टि का जन्म और प्रथम मानव ” नृत्य नाटिका को खचाखच भरे बैजाताल परिसर में जनता ने 48 degree तापमान में तपती हुई पटियों पर[…]

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी (1986 -1995), भाग 12

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी (1986 -1995), भाग 12 समय अपनी चाल चल रहा था ,इन सब बातों के साथ मेरी निजी ज़िंदगी में भी तमाम परिवर्तन हो रहे थे ,बावजूद संगीत के क्षेत्र में असीमित आर्थिक ,पारवारिक और भावनात्मक कठिनाइयों के मैं चाहता था मेरे होने वाले बच्चे भी कला के क्षेत्र[…]

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी (1972), भाग 11

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी (1972), भाग 11 1972 नवम्बर की मेरे द्वारा प्रस्तुत की गयी शहर की प्रथम रंगीन संगीत रात्रि ने संगीत कार्यक्रमों की दिशा बदल दी ,उसकी अपार सफलता ने कई लोगों के मन में ये भी ख्याल लाया कि अजीत सिंह ने इस कार्यक्रम में बहुत पैसा कमाया है[…]