मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी 1968, भाग 03

मेरे संगीत की संक्षिप्त कहानी मेरी जुबानी 1968, भाग 03

फिर तो आज तक मैंने पलट कर नहीं देखा जूनून था अपने शहर में विश्व स्तर के कार्य क्रम देने का ,स्रष्टि के जन्म बैले 05.06.95 को बैजाताल ग्वालियर के तैरते रंगमंच पर ,मेरे द्वारा लिखित और प्रस्तुत, चार सौ कलाकारों द्वारा कई महीने के कठिन प्रशिक्षण के द्वारा प्रस्तुत किये जाने के बाद मेरा ये स्वप्न भी पूरा हुआ .